VBI पंचांग

पंचांग — 17 जुलाई 2027 नई दिल्ली

शनिवार, 17 जुलाई 2027 · आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी · विक्रम संवत 2084

वारशनिवार
तिथिशुक्ल चतुर्दशी — शाम 6:48 तक
पूर्णिमा — रात 9:14 (18 जुलाई) तक
नक्षत्रमूल — सुबह 8:21 तक
पूर्वाषाढ़ा — सुबह 11:18 (18 जुलाई) तक
योगइंद्र — दोपहर 2:23 तक
वैधृति — दोपहर 3:21 (18 जुलाई) तक
करणगर — सुबह 5:40 तक
वणिज — शाम 6:48 तक
विष्टि (भद्रा) — सुबह 8:00 (18 जुलाई) तक
पक्षशुक्ल पक्ष
मास (पूर्णिमांत)आषाढ़
मास (अमांत)आषाढ़
विक्रम संवत2084
शक संवत1949
सूर्य राशिमिथुन
चंद्र राशिधनु — शाम 6:04 (18 जुलाई) तक
सूर्योदयसुबह 5:34
सूर्यास्तशाम 7:21
चंद्रोदयशाम 6:42
चंद्रास्तसुबह 4:55 (18 जुलाई)
दिनमान13 घंटे 47 मिनट
रात्रिमान10 घंटे 14 मिनट
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:00 – 12:55
राहु कालसुबह 9:01 – 10:44

पंचांग के पाँच अंग

पंचांग का अर्थ है पाँच अंग: तिथि (चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12 अंश की दूरी), वार, नक्षत्र (चंद्रमा जिस नक्षत्र में है), योग (सूर्य और चंद्रमा के अंशों का जोड़) और करण (आधी तिथि)। हिंदू दिन सूर्योदय से शुरू होता है, इसलिए यहाँ दिखाई तिथि वह है जो सूर्योदय के समय चल रही थी; उसके ख़त्म होने का समय साथ में लिखा है।

उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा पर ख़त्म होता है (पूर्णिमांत), जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में अमावस्या पर (अमांत) — इसलिए कृष्ण पक्ष में दोनों मास के नाम अलग दिखते हैं।