VBI पंचांग

पंचांग — 15 अप्रैल 2027 नई दिल्ली

गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 · चैत्र शुक्ल नवमी · विक्रम संवत 2084

वारगुरुवार
तिथिशुक्ल नवमी — दोपहर 1:21 तक
शुक्ल दशमी — सुबह 11:22 (16 अप्रैल) तक
नक्षत्रपुष्य — सुबह 9:33 तक
आश्लेषा — सुबह 8:18 (16 अप्रैल) तक
योगधृति — सुबह 8:23 तक
शूल — सुबह 5:38 (16 अप्रैल) तक
गंड — रात 2:58 (17 अप्रैल) तक
करणकौलव — दोपहर 1:21 तक
तैतिल — रात 12:21 (16 अप्रैल) तक
गर — सुबह 11:22 (16 अप्रैल) तक
पक्षशुक्ल पक्ष
मास (पूर्णिमांत)चैत्र
मास (अमांत)चैत्र
विक्रम संवत2084
शक संवत1949
सूर्य राशिमेष
चंद्र राशिकर्क — सुबह 8:18 (16 अप्रैल) तक
सूर्योदयसुबह 5:56
सूर्यास्तशाम 6:47
चंद्रोदयदोपहर 1:16
चंद्रास्तरात 2:46 (16 अप्रैल)
दिनमान12 घंटे 51 मिनट
रात्रिमान11 घंटे 8 मिनट
अभिजीत मुहूर्तसुबह 11:56 – दोपहर 12:47
राहु कालदोपहर 1:58 – 3:34

पंचांग के पाँच अंग

पंचांग का अर्थ है पाँच अंग: तिथि (चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12 अंश की दूरी), वार, नक्षत्र (चंद्रमा जिस नक्षत्र में है), योग (सूर्य और चंद्रमा के अंशों का जोड़) और करण (आधी तिथि)। हिंदू दिन सूर्योदय से शुरू होता है, इसलिए यहाँ दिखाई तिथि वह है जो सूर्योदय के समय चल रही थी; उसके ख़त्म होने का समय साथ में लिखा है।

उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा पर ख़त्म होता है (पूर्णिमांत), जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में अमावस्या पर (अमांत) — इसलिए कृष्ण पक्ष में दोनों मास के नाम अलग दिखते हैं।